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प्रस्तुति- राहुल दुबे

नमस्कार मैं रवीश कुमार !

आज गलती से एक्स क्रिकेटर डॉट कॉम ब्लॉगिंग साइट का पासवर्ड हाथ लग गया है तो यहां हाजिर हूँ।

आज मैं अपने देश में था वहां यूपी से तस्करी तो नहीं कहूंगा लेकिन संघी प्रदेश यूपी से प्रेम पूर्वक उपहार में मिला एक तरल पदार्थ सेवन करके आराम फरमा रहा था तभी शाम के 6:04 पर मेरा फ़ोन बजा जिसका रिंगटोन है “लाखो है दीवाने तेरे लाखो है दीवाने” ।मालूम हो यह गीत श्री भीम जी की भक्ति में गाया गया है, मैंने फोन उठाया उधर से एक सामंती, असमतावादी आवाज में किसी ने कहा “झंडे में चांद और चांद पर झंडा होने में औकात का फर्क होता है।” मेरा सारा प्रेम रस अचानक उतर गया । मैं चौंका इस संदेश से मेरी रूह कांप गयी।याद आया आज तो चंद्रयान उतरने वाला था, सफलता से उतर गया क्या? यदि ऐसा हुआ होगा तब तो आज प्रिय पाकिस्तान की शामत आ जायेगी। फिर पटाखों की आवाज, वंदे मातरम की गूंज मेरे शक को सत्य साबित कर रही थी।
खैर अब तो पाकी भाइयों को गालियों से बधाई संदेश मिलने वाला था एक वेबसाइट के मालिक ने एक पाकी भाई के Account को टैग करके कुछ #*&^ की भाषा में कहा न जाने क्या कहा ? लेकिन वो मालिक संघी है तो जरूर कुछ गलत ही कहा होगा।


ख़ैर चंद्रयान लैंड कर गया सबको बधाई लेकिन मेरे कुछ सवाल अब मैं ही क्यों पूछ रहा क्योंकि आपने तो पूछना बन्द कर दिया है । आप तो आज एकदम किसी काल्पनिक नशे में चूर होंगे अतः सवाल पूछने का बीड़ा तो मेरे को ही उठाना पड़ेगा।

क्या आवश्यकता थी चंद्रयान की ? 615 करोड़ रुपए थे।1- 1 करोड़ सबको बांट दिया रहता तो पूरी दुनिया खुश रहती।सबकी अपनी जरूरतें पूरी हो जाती ।

क्या आवश्यकता थी चंद्रयान मिशन की ? उससे कौन सा मोदी मेरे को इंटरव्यू देने आ जाएंगे ?

आप तो समझते ही है कि मोदी का इंटरव्यू क्यों मुझे ही लेना चाहिए ।

क्या आवश्यकता थी चंद्रयान की ? जब हम खुश तो हैं ही नहीं। क्या अडानी को सजा हुई? क्या हिंडन नदी से हिंडनबर्ग निकला ? यदि नहीं तो चंद्रयान की आवश्यकता ही क्यों है?

चलो माना चंद्रयान गया तो गया लेकिन इसका नाम चंद्रयान ही क्यों रमजान क्यों नहीं ? क्या MOON सिर्फ संघी , फासिस्टों का है शांतिप्रिय अब्दुल का नहीं और तो और ये प्रज्ञान रोवर क्यों नाम था भाई अब्दुर रोवर क्यों नहीं हो सकता? ये क्या सेकुलरिज्म पर घातक हमले नहीं हो रहे हैं ?

और चंद्रयान से क्या ही फायदा जब 25 करोड़ माइनॉरिटी को अभी भी दबाया जा रहा है। परसों पता चला अल्पसंख्यक विभाग में छात्रवृत्ति का घोटाला 2007 से हो रहा था। आज मैं आप सब से पूछता हूँ क्या अल्पसंख्यक समाज को घोटाले की छूट भी नहीं है? यदि 615 चंद्रयान पर बहाए जा सकते है तो अब्दुल का समाज छोटा सा घोटाला भी नहीं कर सकता क्या ?

और मैंने सुना ISRO में कई पोस्ट्स पर आरक्षण नहीं है। ये क्या मजाक हुआ ?ये तो सरासर अपमान है आरक्षण श्रेष्ठ का , अब मैं क्यों मानूं चंद्रयान की सफलता ये तो सफलता ही नहीं मनुवाद है मनुवाद।

और क्या चंद्रयान से सबकुछ बदल जाएगा क्या ? NDTV मुझे मिल जाएगा क्या ? क्या नौकरी सीरीज करने के लिए मुझे भारत रत्न मिलेगा ?

चंद्रयान से लाभ क्या है ? हम एशिया कप खेलने प्रिय पाक के यहां जा नहीं रहे हैं। प्रिय पाक को MKB जैसा कुछ कहा जा रहा आखिर क्यों? क्या ये चंद्रयान की असफलता नहीं है कि उसके चंदा मामा के पास पहुचने के बाद भी कुछ नहीं बदला और ये मामा के घर पर जाने के बाद लोग इतना क्यों उछल रहे हैं? मैं तो अपने मामा के घर हर गर्मियो की छुट्टियों में जाया करता था तब तो किसी 80 लाख लोगों ने मुझे मेरे मामा के घर लैंड करते हुए नहीं देखा ।तो चंद्रयान में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं है। लंबा भी हूँ, हैंडसम बस एक कानपुर के बुजुर्ग से थोड़ा कम हूँ ,मेरे ऊपर तो फ़िल्म भी बनी है, चंद्रयान पर बनी क्या?

मैं तो आदमी का नाम भी बदलने में माहिर हूँ चंद्रयान कर पायेगा क्या?
मैं तो ट्वीट करता हूँ, गाली भी खाता हूं चंद्रयान से हो पायेगा क्या ?

मैं तो राष्ट्रपति भवन में NDTV का एनुअल फंक्शन मनाने के बाद सबको निष्पक्षता का ज्ञान दे सकता हूँ, चंद्रयान कर पायेगा क्या?
यदि सारे सवालों के जवाब नहीं है तो हम खुश क्यों है?

क्या हम जरूरत से अधिक खुश नहीं हो रहे है?


क्या हमको सरकार ने इवेंट टूल बनाकर नहीं रख दिया है ,? जिसमें कभी धर्म की , कभी देश , कभी चंद्रयान की आवभगत में लुभाये रखा जाता है?

ये चंद्रयान कितना बड़ा कट्टर हिंदुत्व का समर्थक है आपने ये सोचा ही नहीं होगा।

चंद्रयान ने 41 दिन का समय क्यों लिया 786 या 72 दिन का क्यों नहीं? क्या ये अब्दुल पर आघात नहीं है?

चंद्रयान नागपंचमी के मात्र दो दिन बाद ही क्यों पहुंचा?ईद के दिन का इंतजार क्यों नहीं किया?

सावन में ही क्यों और 23.08.2023 जोड़ने पर 56 ही क्यों आ रहा कोई और अंक क्यों नहीं?

क्या ये सब सिर्फ इत्तेफाक है, ऐसा तो नहीं हो सकता ये हमारे और आपके आईडिया ऑफ इंडिया पर हमला है। लेकिन आप क्यों कुछ कहेंगे ।

क्या चंद्रयान पर नेहरू जी की तस्वीर थी , क्या चंद्रयान पर गांधी जी का चरखा था ? क्या चंद्रयान पर प्रिय पाक की कोई निशानी थी ? यदि ये सब नहीं था कैसी सफलता और काहे की सफलता हम क्यों मानें?

क्या चंद्रयान ने स्वर कौवे आदरणीय खेसारी लाल यादव को कोई मधुर गीत जैसे ” चंद्रयान का रोवर वा सपन वा में आता है” गाने का मौका दिया ?

चंद्रयान से पृथ्वी की तस्वीरों के हिसाब से पृथ्वी गोल है। क्या ये झूठ अब्दुल का दिल नहीं दुखायेगा ?

लोग मानते है कि चांद के जब टुकड़े टुकड़े हर समय होते हैं तो वहां नेहरू जी के फैंस उसे अपना जी जान
लगाकर जोड़ते हैं।लेकिन क्या चंद्रयान का रोवर उस जुड़ाई पर असर नहीं डालेगा ? अगर चंद्रमा टूटा ही रह गया तो कौन जिम्मेदारी लेगा?

माना सब हो गया लेकिन क्या चंद्रयान चन्द्रमा के सतह को हरा करके सेकुलरिज्म का संदेश नहीं दे सकता था लेकिन ऐसा संघियों के शासन में क्यों होगा?

चंद्रयान एक और मृगतृष्णा है लेकिन कोई मेरी बात क्यों मानेगा?
मैं सबकुछ कर रहा लेकिन मेरी बात कोई नहीं मान रहा, मैं क्या कर सकता हूँ।
अभी असहाय हूँ, लेकिन जिस दिन राहुल जी प्रधानमंत्री बने ,उसी 615 करोड़ नहीं 786 करोड़ खर्च करके रमजान यान भेजूंगा। तबतक के लिए इनके चिढ़ाने को, इनके नकली सफलता को नजरअंदाज करते है। प्रिय पाक के साथ खुद को ढांढस बंधा सकते है।।

तब तक के लिए नमस्कार ।
सतरंगी सलाम।।

प्रस्तुति – राहुल दुबे
सर्वाधिकार सुरक्षित – Exxcricketer.com


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One thought on “चंद्रयान और रवीश कुमार

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