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विपुल

विपुल

तुम सब ठलुओं को कोई काम तो है नहीं।
बॉयकॉट चिल्ला चिल्ला के एक मन्दबुद्धि नाटे आदमी की फ़िल्म फ्लॉप करवा दी और मुंह उठा कर रिव्यू भी देखने चले आये।
अब आ ही गये हो तो रिव्यू पढ़ लो,समय काटने के लिये।

मैं रावतपुर क्रॉसिंग पर स्थित रेव एट मोती पर लाल सिंह चड्ढा फ़िल्म देखने गया था ।
दरअसल फ़िल्म देखना एक बहाना था।यहाँ बिग बाजार में मज़ा बहुत आती है।
ऐसी है ना !
मेरे घर में नहीं है।

एक पचास का शो था ।टिकट खिड़की पर एक काला मोटा और बदसूरत लड़का बैठा था जो गुलाबी पैंट और काली शर्ट में खुद को पिस्टल पांडे समझ रहा था।
मैंने टिकट माँगी तो उसने गन्दा सा मुंह बनाया ।
“हिन्दू नहीं हो क्या बे ?”
बॉयकॉट नहीं करोगे।

मैंने जवाब दिया कि “ऐसी में सोना है भाई ।”
“ट्रांसफार्मर फुंक गया मोहल्ले का ।”

बड़ी घृणास्पद दृष्टि से मुझे देखते हुये 200 वाली टिकट दी और किसी को फोन पे तुरंत बताया।
“अरे वो कानपुर पश्चिम वाले प्रचारक महोदय के साथ जो कल दीनदयाल में मिले थे ,आज लाल सिंह चड्ढा देखने आये हैं।”

“हद है ।बुढ़ौती में अय्याशी सूझि रही।घरे खबर पहुँचाबौ इनके।”
“हां हां एक परकटी ऊ रही संग मां।”

मैंने उसे वहीं खड़े होकर घूरना शुरू किया तो बोला ,”नहीं भाई साहब आपके बारे में नहीं बोल रहे।”
“आप जाओ फ़िल्म देखो जाकर।”

लिफ्ट में चढ़ा।
“मूवी फ्लोर “
लिफ्ट बॉय ने मुझे बड़ी तिरस्कृत नज़रों से देखा।
लेकिन मैं बेशर्मी से झेल गया।
हालांकि मेरे लिफ्ट से बाहर निकलते ही वो भी फोन पर किसी से बोल रहा था।
“भाई !मज़े तो बूढ़े ले रहे आजकल।
खाली सिनेमा हॉल और जो चाहे सो करो। “
मैंने पलट के उसे देखा ।
लड़का हड़बड़ाया ।
“नहीं सर ,आपसे नहीं कह रहा ।”

डोर पर तलाशी और टिकट चेक करने वाले ने बड़ी शैतानी से मुझे देख कर पूँछा।
“आप विपुल सर हैं न ?
?”
मैं हड़बड़ाया ।
क्यों ?
“नहीं एक मैडम आपका इंतजार कर रही हैं ।सबसे ऊपर वी आईपी बॉक्स में ।”
“ये गोल्ड की टिकट बेकार में ले ली आपने ।”

ये क्या तमाशा था भाई ?

लेकिन मैं शरीफ आदमी हूँ ।इसलिये चुपचाप अपनी गोल्ड की सीट पर ही बैठा।
पूरे हाल में मुझे मिलाकर 15 लोग थे।
7 नर मादा जोड़े में थे ।
मैं अकेला।
वीआईपी बॉक्स ऊपर होता है।वहां का पता नहीं।

बत्ती बन्द होते ही फ़िल्म से ज़्यादा उह आह आउच की आवाज़ें आने लगी थीं।

मुझे फ़िल्म से कोई मतलब नहीं था।
केवल ऐसी में सोना था।
इसलिये सो गया।
भयंकर कोलाहल में खड़े खड़े सोने की आदत रह चुकी है।
यहाँ तो गद्दीदार कुर्सी थी।सो गया।

नींद तब खुली जब इंटरवल में कैंटीन वाले ने जगाकर पूँछा ।
“60 वाली बिसलरी पियेंगे या 108 वाले समोसे खाएंगे या 250 वाली कॉफी या 500 वाला पॉपकॉर्न ?”
“20 वाली मैग्गी है ?”
“नहीं है सर !”
“तो सोने दे न bsdk !”

दोबारा नींद तब खुली जब थियेटर में सफाई करने वाला लड़का आया।
उसने झकझोर के मुझे उठाया।
“सर फ़िल्म खत्म हो गई ।”
“घर जाओ अब !”

यहीं मुझसे एक चूक हुई।
नीचे कैंटीन में कॉफ़ी पीने बैठ गया।भीड़ बहुत थी।अचानकमुझे अपने सामने काली साड़ी में एक गोरी महिला सफेद सूट पहने एक काले आदमी के साथ दिखी।
ये सपना शुक्ला (परिवर्तित नाम ) थी जो मेरे साथ कॉलेज में थी और उसके साथ उसका पति विपुल मिश्रा था।
मेरा और उसका दोनों का नाम सेम था।

सपना और विपुल वीआइपी बॉक्स में थे।और विपुल बाद में आया था।यही कंफ्यूजन था।
खैर हम तीनों ने कॉफी पी।
इस दरमियान विपुल का कोई फोन आया और सिग्नल न होने की वजह से उसे उठ कर दूसरी जगह जाना पड़ा।
5 मिनट के लिये।
इतने में ही काण्ड हो गया।
जो मुझे बाद में पता चला।
जब मैं घर पहुंचा तो बड़े भाई ,भाभी ,बहन ,जीजा सब मौजूद।
मुझे हर घड़ी जार जार रुलाने वाली खुद रो रही थी।
भाई मुझ पर गुस्से में थे ।दीदी मुझ पर चप्पलें बरसाने के मूड में।
हुआ क्या था ?

उन 5 मिनटों में जब सपना का पति विपुल हटा था और मैं और सपना हंस हंस कर समोसे खा रहे थे ,कॉफ़ी पी रहे थे।
भगवान ने बता दिया था ,कानपुर कितना छोटा है।
भाभी की छोटी बहन की ननद और उसके हसबैंड।
भतीजे के दोस्त
भांजी की सहेली
मेरे साले का दोस्त।
ये सब ठीक उसी समय वहाँ मौजूद थे।
फोटुएं खिंच गईं थीं।
भतीजे के दोस्त ने होटल रूम की बुकिंग तक अपनी चाची को बता दी थी ।
साले के दोस्त ने कसमें खाकरअपनी दीदी को बताया था कि मैं सपना को साड़ी खरीद कर दे रहा था।

मुझे सफाई देने का कोई मौका नहीं दिया गया।
अब बड़ा हो गया हूँ तो बड़े भाई और दीदी ने बस मारा ही नहीं।
बेइज़्ज़ती में कोई कसर नहीं छोड़ी।
श्रीमती जी को मेरे ऊपर की 70 हज़ार उधारी याद आ गई।
खाना होटल में खाया।

और आप लोग लाल सिंह चड्ढा मूवी का रिव्यू जानना चाहते हैं ?
मत देखो।
अभिशप्त फ़िल्म है।
जब मैं पूरी फिल्म में सोता ही रहा तो ये हुआ।
देख लेता तो तलाक ही हो जाता।
🙏🙏🙏

विपुल

विपुल

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7 thoughts on “मेरा रिव्यू -लाल सिंह चड्ढा

  1. शानदार लिखते हो विपुल भईया।मजा आगया।ऐसे ही लिखते रहो।धन्यवाद🙏👍

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