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लेखक :- विपुल

विपुल

पिछले साल की बात है | काफी परेशान था | घर पर बंद केवल मोबाइल का सहारा था |पत्नी बच्चे कोरोना से पीड़ित थे , तब ये थ्रेड लिखी थी | अब ब्लोगिंग साइट बना ली तो हूबहू वोही पोस्ट कर रहा हूँ |

ये लेखन नहीं , मेरे दिल से निकली आवाज़ है |

आज एक ट्विटर स्पेस जॉइन किया जिसमें बड़े बड़े ट्विटर सेलेब थे । @Sassy_Soul_ होस्ट थीं । @Being_Humor और @GaurangBhardwa1 जैसे ट्विटर सेलेब थे ।बकचोदी हो रही थी ।डिप्रेशन के बारे में मैं बोलना चाहता था, सही हो चुके एक पेशेंट के तौर पर ,लेकिन मौका नहीं मिला।

एक जनाब बोल रहे थे , गैस बनती है डिप्रेशन में सबसे पहले , फिर हार्ट के डॉक्टर को दिखाया |फिर एन्जायटी हो गई।कुछ सुघड़ कन्याएं पेशेन्ट होने का दिखावा कर रही थीं।कोई एक्सपर्ट भी थी मानसिक रोग विशेषज्ञ ।अच्छी बातों की जगह बकवास और शो ऑफ ज़्यादा था।मानसिक स्वास्थ्य हल्का विषय नहीं है |

मानसिक स्वास्थ्य के बारे में मैं कुछ गम्भीर बातें करना चाहता हूँ।मेरे पिताजी और मेरे डॉक्टर की वजह से मैं ठीक हो पाया। मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के तीन महत्वपूर्ण कारक हैं। 1. आर्थिक समस्या 2. सेक्सुअल प्रॉब्लम 3 .वंशानुगत कारण। तीसरा कारण कम होता है , ऊपर के दो ज़्यादा||

बीमारी की शुरुआत होती है जब आपको किसी कारण अपने आत्मविश्वास में कमी महसूस होने लगती है।पहला चरण यही है। दूसरे चरण में आप लोगों से कटने लगते हैं।तीसरे में आप घबराने लगते हो चौथी और फाइनल स्टेज में आपको कुछ भी अच्छा बुरा लगना बन्द हो जाता है।और जीवन निस्सार लगने लगता है||

ऐसे समय मे परिवार और दोस्तों का रोल अहम होता है।हमेशा मरीज को हौसला दिलाने वाली बात करें।कोमेडी और स्पोर्ट्स पर मरीज को ध्यान लगाने पर मजबूर करें।देखें कि उसे सही नींद आ रही या नहीं।बच्चों के कार्टून और शरारती बच्चों को मरीज के आस पास रखें।

दवाई भी अहम है ,पर ऊपर की सारी चीज़ें काम आसान करती हैं।मरीज को उसके जीवन की और परिवार के प्रति उसकी उपयोगिता बताये ,दिखाएं।बच्चों के कार्टून से लेकर प्लेबॉय की नग्न तस्वीरों तक जिससे मरीज को अच्छा लगे यूज करें।चिंता छोड़ो सुख से जियो , डेल कार्नेगी जैसी किताबें पढ़ाये||

नींद और भूख जब मरीज को लगने लगे और उसका मन कुछ स्पोर्ट्स या न्यूज़ या मूवी में लगने लगे ,ये सही होने के लक्षण हैं।सही होने के लिये मरीज को आत्मविश्वास दिलाना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

मैं अपनी नौकरी छूटने और क़र्ज़ के कारण डिप्रेशन में गया था।

उस क़र्ज़ को चुकाने को मेरी प्रेयसी ने मुझे अपने पास से रुपए दिये।मेरी आमदनी तब नहीं थी ।उसी कारण हमारी लड़ाई हुई।मैं पैसे वापस नहीं कर पाया दोनों जगह ।लम्बा क़र्ज़ था।डिप्रेशन में गया।

मेरे पिताजी मुझे कई जगह ले गए| योगाश्रम भी ले गये।आखिर में उन्हें पूरी बात पता चली।तब तक मेरा केस बिगड़ चुका था |

अंदर अंदर घुटने के बाद मैंने पिताजी को सब बताया।अस्पताल में बेड पर लेटे लेटे।वो खिलखिलाये ,मेरा डॉक्टर वहीं था।पिताजी बोले चल शेव बना ले और चल पिक्चर देखेंगे शाम को।

टी वी पर अपना सपना मनी मनी पिक्चर देखते हुए उन्होंने एक बात कही ,

“अगर अपने मन की सारी बातें ,सारी उलझनें अपने बाप से कह दोगे तो कभी भी कोई मानसिक समस्या नहीं हो सकती।”

“बाप बाप होता है, अधिकार भी जतायेगा और सारी मुश्किलों से बचाएगा भी।”

आज तक याद है वो लाइन अपने स्वर्गवासी पिताजी की |

कई दिनों बाद मैं ठीक हुआ।लगातार दवाएं चलीं ।डॉक्टर के संपर्क में रहा।फिर से क्रिकेट खेला, फिर जॉब की ।मुझे एक बात समझ आई , अगर आप अपनी उलझनों को अपने पिता से शेयर कर सको तो जल्दी कोई मानसिक बीमारी नहीं होगी। बाकी प्रभु इच्छा|

(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं |ट्विटर पर ये थ्रेड 6 अप्रैल 2 ० 2 1 को मेरे द्वारा @exx_cricketer twitter handle पर पोस्ट की गयी थी |ये ट्विटर हैंडल अब कार्यरत नहीं है | )

लेखक-विपुल

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