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जिन्दगी सबसे महत्वपूर्ण है
विपुल मिश्रा

बकवास से बकवास चीज़ें भी कभी काम आती हैं और कभी कभार मौका मौसम और माहौल ऐसा होता है कि काम की चीज़ों से भी ज्यादा बकवास कुछ नहीं लगता।
इस भरे संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जो काम का न हो, कुछ भी नहीं का मतलब कुछ भी नहीं और इसमें आप भी आते हैं।
खुद को दुनिया के लिये बेकार समझना और दुनिया छोड़ देने की बातें करने वाले शायद हताशा की नदी के सबसे गहरे भंवर में पहुंच चुके होते हैं।आप तब तक उनकी मनोस्थिति सही नहीं समझ सकते जब तक कि आप उनकी परिस्थितियों से गुजरे न हों या उनको निकट से न देखा हो।
बात भारी भरकम हो जायेगी।
और तब समझाना बड़ा मुश्किल हो जाता है लोगों को।
आत्महत्या की कोशिश करने वाले 90 प्रतिशत लोग अच्छे से ये मान चुके होते हैं कि उनके होने न होने से दुनिया में कोई फर्क नहीं पड़ता।
ऐसे लोगों की काउंसलिंग काफी मुश्किल होती है और मैं कोई मनोवैज्ञानिक काउंसलर भी नहीं जो इस बारे में कुछ बोलूं।
पर कुछ बोलना ज़रूर चाहता हूं इस विषय पर।
मैं लंबी लंबी बातें यहां छौंक सकता हूं कि समुद्र की पानी की एक बूंद भी काम आती है, आप जिंदा रह के जो कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हो, वो ऑक्सीजन के काम आती है तो बस इसी बहाने खुद को महत्वपूर्ण समझो, पर मैं ऐसा बोलना पसंद नहीं करूंगा।
ये सब बड़ी बड़ी बातें काम नहीं आतीं उन लोगों पर जो दुनिया से निस्सार हो चुके हों।
इसके बजाय मैं बोलूंगा कि ऐसे लोगों को बचाने के लिये सिर्फ ऐसा एक मोमेंट काम आ जाता है जो जिन्दगी में उनकी रुचि वापस जगा दे।
वो एक अनूठा मोमेंट कुछ भी हो सकता है, वो एक अनूठी चीज कुछ भी हो सकती है।
उस एक अनूठे मोमेंट में कोई बकवास से बकवास चीज भी ऐसी हो सकती है जो मानसिक रूप से आत्महत्या की ओर बढ़ते किसी व्यक्ति को दुनिया से दोबारा कनेक्ट कर सके।
एक सिगरेट, एक कप चाय, एक बोतल, एक लड़की, एक किताब, एक फिल्मी सीन, कोई मुस्कुराता हुआ बच्चा, कोई शरारत करता जानवर, एक झाड़ू या एक केले का छिलका भी।
उस मोमेंट को अगर वो आदमी पकड़ ले और वहीं से दोबारा जीने की इच्छा जगा ले तो अच्छा होता है। अक्सर मानसिक बीमार आदमी तो वो मोमेंट पकड़ लेता है, पर उसके अगल बगल के लोग समझ नहीं पाते, या मान नहीं पाते। कुछ चीजों को बुरा या बकवास समझ के।
पर मेरे विचार इस मामले में बहुत अलग हैं।
आयुर्वेद का प्रथम नियम है कि कोई भी चीज जो किसी की जान बचाये , वो औषधि ही है। कोई भी चीज मतलब कोई भी चीज।
मार्फिन एक भयंकर नशा है, डॉक्टर इलाज में प्रयुक्त तो करते ही हैं न?
सांप का जहर,सांप काटे के इंजेक्शन में काम आता ही है न?
ये चीज ध्यान में रखनी चाहिये।
मेरा मानना है।
आप असहमत हो सकते हैं पर मेरा दिमाग शिक्षित सुसंकृत बुद्धिजीवियों जैसा नहीं चलता।
कोई असामाजिक सी चीज, कोई नशा भी आत्महत्या की ओर बढ़ते किसी व्यक्ति का मन दोबारा ज़िंदा रहने की ओर आकर्षित करने में काम आ रहा है तो उसमें बुरी बात नहीं।
जिन्दगी सबसे महत्वपूर्ण है।
जिन्दगी हमेशा ही मौत से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।अपनी जान बचाने को या अपने किसी की जान बचाने को आप को कुछ ऐसी चीजें करनी पड़ती हैं जो असामाजिक हैं तो उसमें बुराई नहीं।
मौत के बाद कुछ भी सामाजिक या असामाजिक नहीं बचता।
लाश बचती है केवल।
आपकी या आपके परिजन की
🙏🙏
विपुल मिश्रा
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