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जिंदा रहो यार!

विपुल मिश्रा

कितने लोग आपको जानते हैं और कितने लोगों की जिन्दगी में आपके कुछ करने या न करने का महत्व है?

सोच के देखना जरा ।

और मैं आपके मॉरल डाउन करने को नहीं लिख रहा।

आपके मानसिक फायदे के लिए ही पूंछ रहा।

आप जानते हैं कि मैं विजेताओं के लिए नहीं लिखता, न ही इतना बड़ा मोटिवेशनल इनफ्लुंसर हूं कि आपको एक ही दिन में चार सांडों से कुश्ती लड़ने लायक हौसला दिला सकूं।

मैं तो केवल हारे थके और टूटे लोगों के लिए लिखता हूं जो शायद ज़िन्दगी का एक दिन और जी सकें,मेरी लच्छेदार बातों में आकर।

जिन्दगी अनमोल है और बार बार नहीं मिलती।

अगर हिंदू धर्म को मानते हो तो ये भी मानो आपकी खुशकिस्मती है कि भगवान ने आपको मानव जीवन दिया। वो आपको चूहा मेंढक छिपकली या काकरोच का जन्म भी दे सकते थे और शायद गुबरैले का भी।

घिन आई? गिजगिजाहट महसूस हुई? और यही तो मैं चाहता भी हूं। सोच के देखो, जब ईश्वर ने तुम्हें इस काबिल समझा कि तुम्हें छिपकली या गिंजाई न बना कर मानव बनाया तो तुम अपने को भगवान से बड़ा समझने लगे कि ये जीवन खत्म कर दो?

खुदकुशी करने से पहले एक बार सोच लेना कि भले लूले हो या लंगड़े, अभी इंसान ही हो। कोई गारंटी  नहीं कि अगला जन्म इंसान का ही मिले। जरूरी नहीं कि ईश्वर अगले जन्म में तुम्हें तीतर या बटेर जैसा भी कुछ बनाने की सोचें भी।नाली का कीड़ा भी बना सकता है वो तुम्हें।

हां, तो बात ये थी कि कितने लोग तुम्हें जानते हैं और उनके तुम्हारे बारे में अच्छी या गलत बात बोलने या सोचने का कोई प्रभाव पड़ता भी है जो तुम खुदकुशी का सोचो? शर्त है कि तुम्हारे घर से बस 40 घर की दूरी पर रहने वाले आदमी को इस बात से कोई मतलब नहीं होगा कि तुम्हारा कोई वीडियो वायरल हुआ, तुम्हारा रेप हुआ या तुम चोरी में पकड़े गए? उसकी खुद की जिंदगी में भी बहुत चकल्लसें होंगी भाई।

एक आदमी की जिन्दगी में शायद ही 150 से ज्यादा लोग होते हैं जो उसके बारे दिन भर में एक बार भी  सोचते होंगे और ये आंकड़ा भी उनके लिए है, जिनका परिवार बहुत बड़ा है। आपकी पूरी 60 साल की जिन्दगी में भी 60 लोग भी ऐसे नहीं होंगे , जिनके लिए आप इतनी अहमियत रखते होंगे कि आप क्या करते हैं और क्या नहीं करते, उससे उन्हें फर्क भी पड़ता होगा। इसलिये थोड़ा बेशर्म बनो। मैं हमेशा बोलता हूं कि जिंदा रहने के लिए बेशर्मी एक बहुत बड़ी औषधि है।

आपकी जिन्दगी महत्वपूर्ण है। आपके साथ रेप हुआ, आप का वीडियो वायरल हुआ, आपके साथ प्रेम संबंधों में छल हुआ, ये इतना मायने नहीं रखता जितना ये कि ये आपकी जिन्दगी है और आपको जीना ही है। आपने कुछ गलत नहीं किया।

पेरिस हिल्टन अमेरिका की सबसे अमीर और प्रतिष्ठित परिवार से है, पोर्न स्टार नहीं है।उसके ब्वॉयफ्रेंड ने धोखा करके उसका सेक्स वीडियो इंटरनेट पर डाल के पैसे बना लिए। क्या उसने आत्महत्या कर ली या पब्लिक में आना छोड़ दिया? उसकी छोड़ो, हार्दिक पटेल बेशर्मी से घूम रहा है, नेता भी बना हुआ।

दोनों सफल हैं। दोनों की खासियत बेशर्म बने। आप सफल होना चाहते हो या नही, ये अलग बात है

 पर सफलता के लिए बेशर्मी भी एक आवश्यक तत्त्व है। नहीं मानते तो अरविन्द केजरीवाल को देख लेना। वो नरेंद्र मोदी के बाद भारत का सबसे सफल राजनेता है और बच्चों की झूठी कसमें खा चुका है, राज करने के लिये।

आप सफल होना चाहते हैं या नहीं, उस पर मिट्टी डालो। उससे मुझे मतलब भी नहीं। पर मुझे मतलब है कि आप जिंदा रहें और जिंदाबाद रहें। दूसरा कोई आपसे कुछ बोले भी तो बेशर्म बनके जवाब दें।

तेरी बेटी के साथ भी ये हो सकता था बे!

और कॉलर उठा के निकल जाएं , वहां से चल फूट बोल के।

आप सबसे महत्वपूर्ण हैं इस भरी दुनिया में, बाकी सब चमन हैं।

समझो या चाय पियो।

बस जिंदा रहो यार! आत्महत्या मत करो!

😂😂

अब कुछ अपने बारे में

मेरी याददाश्त से 2003 के सात आठ माह गायब हैं।मुझे वाकई याद ही नहीं है कुछ भी उस दौरान का। कारण क्या था? ये बताना जरूरी नहीं फिर भी!

उसके बाद दिन में 33 -33 गोलियां खाता था। दिमाग में ऐसी झनझनाहट होती थी कि न सो पाता था, न जग पाता था।

एक मिनट से ज्यादा किसी चीज को याद नहीं रख पाता था।

फांसी लगाने का प्रयास कर चुका, पर बचा लिया गया।

इस सबके बाद भी अगर आज मैं एक सुंदर बीवी के साथ छोटे से घर में प्यारे से बच्चों के साथ छोटी सी सही, एक नौकरी करके परिवार पाल रहा तो बेशर्मी पर बकवास करने का हक मुझे तो है ही।

और मुझे उस समय ये नहीं पता था कि कभी मेरी ये बकवास सुनने सुनने बीस आदमी इकट्ठा भी होंगे।कई बड़े और नामचीन लोग मुझसे जुडेंगे।कभी मैं किताबें भी लिखूंगा और कभी मेरी इतनी औकात भी होगी कि मेरे जरा सा कहने बहुत से लोग मेरी बात मान जायेंगे।

मैं वहां से यहां सिर्फ बेशर्मी लाद के पहुंचा।

और वही बताता रहता हूं कि एक  बेशर्म आदमी की जिन्दगी एक शरीफ की मौत से ज्यादा उपयोगी होती है।

जिंदा आदमी कभी बेशर्म तो कभी भी शरीफ बन सकता है।

मुर्दा आदमी राख या मिट्टी बनने के अलावा कुछ भी और नहीं बन सकता।

ये मेरे विचार।

आप सहमत हों या असहमत।

पर बदलेंगे नहीं मेरे विचार।

आपका और केवल आपका – विपुल मिश्रा

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One thought on “जिंदा रहो यार!

  1. धन्यवाद विपुल जी…..
    मैं खुद इस समय depression से जूझ रहा हूं…. Job के बिना हर समय गलत ही ख्याल आते हैं….
    कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है कि कैसे लाइफ सही पटरी पर आएगी…. पर एक चीज सोच रखी है कि जब तक सांसे है हिम्मत नहीं हारनी है।
    🙏
    सुरेश चौधरी…

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