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सिनेमा और साहित्य

सिनेमा और साहित्यआपका - विपुलचलिये आज कुछ सीरियस बातें कर लेते हैं सिनेमा पर।साहित्य निश्चित तौर पर समाज का दर्पण है पर सिनेमा बिलकुल भी समाज का दर्पण नहीं है।सिनेमा हमारे मनोरंजन का साधन है। पुस्तकें मनोरंजन का साधन कभी हो भी सकती हैं, कभी नहीं भी हो सकतीं।पर सिनेमा…

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मूवी रिव्यू – छावा

मूवी रिव्यू - छावाछावा फिल्म देखी!आज के बॉलीवुड से अपना मन जुड़ता नहीं है।पर हिन्दुत्व के अग्रणी संभाजी के जीवन पर बनी फिल्म तो देखनी ही थी।संभाजी का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि ढाई घंटे की फिल्म मे उसको समावेशित करना लगभग असंभव है।फिर भी निर्देशक ने एक कोशिश की…

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मेरा रिव्यू -बैड न्यूज

मेरा रिव्यू - बैड न्यूजआपका विपुलभावनाओं की बारिश के साथ छत की नाली भी बह रही थी और छज्जे पर अकेले में बैठा मैं 2007 का वो सावन याद कर रहा था जब मैं और श्वेता साथ साथ बनारस के घाट पर भीगे थे।कुछ रात ठीक से सोया नहीं था…

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कटपीस कल्चर के प्रभाव में

कटपीस कल्चर के प्रभाव मेंप्रस्तुति - डॉ रमाकान्त राय अभी हाल ही में स्वातंत्र्य वीर सावरकर फिल्म का ट्रेलर जारी हुआ है।उस फिल्म में वीर सावरकर की भूमिका निभाने वाले अभिनेता रणदीप हुडा ने एक वक्तव्य से लोगों में उत्तेजना फैला दी कि यदि गाँधी जी न होते तो भारत…

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ट्विटर की अदालत भाग 1 – भूरी बनाम बच्चन

ट्विटर की अदालत भाग 1 - भूरी बनाम बच्चन द्वारा मिजाज ट्विटर हैंडल @Chhaliya__ काले सूट में एक कौए की तरह ध्यान मग्न दिख रहे न्याय मूर्ति विपुल मिश्र एकटक न्याय की मूर्ति को देख रहे थे। हालांकि जज बन कर उनकी इच्छा तो बहुत रहती थी कि"ये देवा की…