चौथाई सदी के भारतीय खेल सितारे
आपका -विपुल
2026 चल रहा है और आज भारतीय खेलों के क्षेत्र में पिछले 25 सालों को पलट कर देखने का वक्त है |कौन हिट रहा ,कौन फिट रहा ,कौन स्टार रहा और कौन सुपर स्टार रहा ,आज इसकी बात होगी |कोशिश तो है कि खेलों के क्षेत्र में सबसे अच्छा करने वाले हर एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को रखूँ ,पर ये कोशिश कितनी कामयाब हो पाती है ,ये तो आप लोग ही जज कर सकते हैं |
विराट कोहली

सचिन तेंदुलकर की बात नहीं करेंगे |वो वैसे भी इन सब लिस्टों से ऊपर की चीज़ हैं |पर सचिन के बाद जो उनके जूतों में पैर रखने लायक अगली पीढी का भारतीय बल्लेबाज़ हुआ ,वो कोहली ही था |कोहली टेस्ट मैचों और टी 20 से संन्यास ले चुके हैं पर एकदिवसीय अभी भी खेलते हैं |कोहली के 562 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 52 के बल्लेबाजी औसत से 28359 रन हैं और 85 शतक |रनों और शतकों दोनों में कोहली सचिन के ठीक बाद दूसरे नंबर पर हैं |कोहली से अधिक ये भारतीय क्रिकेट फैन्स का दुर्भाग्य रहा कि कोहली न 10 हज़ार टेस्ट रन्स पूरे कर सके,न ही टेस्ट में 50 का बल्लेबाजी औसत पा सके|वैसे 2014-19 का कोहली सचिन या लारा के बराबर का प्रतिभाशाली था पर अफ़सोस कि कोहली का ये सुनहरा दौर आगे टेस्ट मैचों में नहीं चल पाया |वैसे कोहली की लोकप्रियता छप्पर फाड़ रही इस दौरान |
पी वी सिन्धु

पीवी सिन्धु इस दौरान भारतीय बैडमिंटन की रानी रहीं |सानिया नेहवाल की सफलता के बाद भारतीय महिला बैडमिंटन की इस रानी को सबसे पहले चीनी खेल सामग्री निर्माता कम्पनी ली निंग ने अनुबंधित किया था जो किसी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी के लिये बड़ी बात थी |शायद ये 2014 की बात थी |दो सालों बाद ही सिन्धु ने दिखाया कि ली निंग जैसी बड़ी कम्पनी ने उन पर दांव क्यों लगाया था |सिन्धु 2016 ओलंपिक का फाइनल खेलीं और रजत पदक जीतीं |2020 ओलंपिक में सिन्धु कांस्य पदक जीतीं | बैडमिंटन का खेल बहुत ज्यादा कठिन खेल है और इसमें चीन ,ताइपे,कोरिया,जापान और इंडोनेशिया इतने ज्यादा हावी हैं कि किसी भारतीय खिलाड़ी का एशियन गेम्स में भी जीत पाना दुर्लभ है |सिन्धु ने एशियाड का रजत पदक जीता है |केवल बैडमिंटन की बात करें तो भारतीय स्टार शटलर साइना नेहवाल ने चीन की दीवार में सेंध लगाई थी सिन्धु ने थोड़ी बहुत दीवार ही गिरा दी|अभी अभी जापान ओपन का खिताब जीता है जो पहले कोई भारतीय न जीत सका था |
पी आर श्रीजेश

भारतीय फील्ड हॉकी ने विगत दस सालों में ऐसा प्रदर्शन किया है जो खराब नहीं माना जा सकता |इस दौरान भारतीय हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में 2014 व 2022 में स्वर्ण पदक जीता|चैम्पियंस ट्रॉफी में दो बार रजत पदक जीता (2016,2018) और सबसे बड़ी बात !
भारतीय फील्ड हॉकी ने 1980 के बाद पहला ओलंपिक पदक (कांस्य) 2020 में जीता जिसमें पी आर श्रीजेश की विशेष भूमिका थी जो इस भारतीय टीम के गोलकीपर थे|2014 के एशियाड फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ पेनाल्टी बचा कर भारत को गोल्ड दिलवाने वाले पी आर श्रीजेश इस पूरे ओलंपिक अभियान में भारत के गोल्डन बॉय रहे |2024 में भी भारतीय हॉकी टीम कांस्य पदक जीती और इस बार भी गोलकीपर पी आर श्रीजेश ही टीम की जान रहे |
देखो, हो सकता है कि आपको भारत के ओलंपिक कांस्य पदक जीतने को इतना महत्त्व देना आपको समझ न आये ,पर खेलों के दीवाने इस देश में ओलंपिक पदक की कीमत बहुत ज्यादा है और हॉकी तो हमारा राष्ट्रीय खेल भी माना जाता रहा है जिसमें हम ओलंपिक चैम्पियन रहा करते थे|वैसे ओलंपिक हॉकी में चालीस सालों के सूखे के बाद कोई एक पदक दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले पी आर श्रीजेश की तारीफ़ तो बनती ही है |और फिर प्रदर्शन दोहराया भी पी आर श्रीजेश ने |
विश्वनाथन आनंद

शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद निर्विवाद रूप से भारत के महानतम खिलाड़ियों में गिने जा सकते हैं |गैरी कास्परोव जैसे दिग्गज को अपने समय में टक्कर देने वाले शतरंज के इस भारतीय जीनियस ने 2002 में अपना पहला फीडे विश्व शतरंज चैम्पियनशिप जीता और फिर 2007 से 2012 तक चार बार निर्विवाद रूप से फीडे विश्व शतरंज चैम्पियनशिप और जीती |भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद 2800 से अधिक ELO रेटिंग पाने वाले पहले चार शतरंज खिलाडियों में से एक हैं |बाकी तीन गैरी कास्परोव,व्लादीमीर क्रेमनिक,वेसेलिन टोपालोव जैसे दिग्गज थे |वर्तमान में विश्वनाथन आनंद फीडे के कार्यकारी अध्यक्ष हैं |शतरंज के संगठन फीडे में अमेरिका और रूस का दबदबा रहता है |अगर विश्वनाथन आनंद फीडे के कार्यकारी ही सही,अध्यक्ष हैं तो शतरंज के क्षेत्र में उनके कद का अंदाजा लगाइये तो ज़रा |
नीरज चोपड़ा

भारतीय सेना में जेसीओ के रूप में कार्यरत 29 साल के नीरज चोपड़ा को निर्विवाद रूप से भारत के आल टाइम ग्रेट खिलाडियों में शामिल किया जा सकता है और उनकी कुर्सी मेजर ध्यानचन्द ,सचिन तेंदुलकर और विश्वनाथन आनंद के अगल बगल ही कहीं होगी |नीरज चोपड़ा भाला फेंक खेल खेलते हैं और इस खेल में उन्होंने भारत के लिये 2020 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता जो ओलंपिक इतिहास में एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक है |नीरज चोपड़ा ने 2024 ओलंपिक में रजत पदक जीता |एशियन गेम्स, राष्ट्रमंडल खेल,विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप ,डायमंड लीग ,जो जो भी प्रतियोगितायें भाला फेंक खेल की मुख्य होती हैं ,नीरज चोपड़ा सभी में कम से कम एक बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं |मात्र 29 साल की उम्र में नीरज चोपड़ा भारतीय खेल जगत की सबसे बड़ी हस्तियों में से एक बन चुके हैं ,जिसके लिये पहले नंबर से नीचे रहने का कोई मतलब नहीं होता |स्वर्ण पदक ही चाहिये|बस |
फ़िलहाल केवल इन्हीं पाँच खिलाडियों के बारे में बता के रुकता हूँ |इस सीरीज का दूसरा पार्ट भी होगा ,बस थोड़ा सा इंतज़ार करें |
आपका -विपुल
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