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कीर्ति

उज्जैन
अवंतिका
उज्जयिनी
ये सब महाकाल की उस पवित्र ऐतिहासिक नगरी के नाम हैं जो मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है |उजैन इस नगरी का नवीन नाम है |उज्जयिनी पुराना ,अवंतिका और पुराना |
उज्जैन स्वर्ग है क्यों है ?जानते हैं ?

धार्मिक महत्त्व

उज्जैन एक मात्र स्थान ऐसा है जहाँ पर शक्तिपीठ भी है और ज्योतिर्लिंग भी ।
ज्योतिर्लिंग है महाकालेश्वर |और शक्तिपीठ अवंतिका देवी का |


यहाँ सती माता के होंठ गिरे थे |एक हरसिद्धि पीठ और है जहाँ देवी माता की कोहनी गिरी थी |
उज्जैन उन चार स्थानों में से एक है जहाँ पर कुम्भ महापर्व का भी आयोजन किया जाता है ।
उज्जैन में साढ़े तीन काल विराजमान हैं।
महाकाल,कालभैरव गढ़कालिका और अर्धकाल भैरव।
उज्जैन में तीन गणेश भी विराजमान हैं।
चिंतामन मंछामन और इच्छामन
यहाँ 84 महादेव है, सात सागर और नव नारायण
सात सागर जो उज्जैन में हैं वो हैं -रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीर सागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर
नव नारायण जो उज्जैन में हैं उनके नाम
पुरुषोत्तम नारायण अनंतनारायण सत्यनारायण चतुर्भुज नारायण आदिनारायण शेषनारायण पद्मनारायण लक्ष्मीनारायण बद्रीनारायण|
84 महादेव जो उज्जैन में विराजमान हैं
अगस्तेश्वर, कर्कोटेश्वर, लोकपालेश्वर, प्रयागेश्वर, संगमेश्वर, पिशाचमुक्तेश्वर, लिंग गुहेश्वर, अरुणेश्वर, ढूंढेश्वर, स्वर्णज्वालेश्वर, डमरुकेश्वर, मनकामनेश्वर, कर्कटेश्वर, दुर्घटेश्वर, केदारेश्वर, प्रथुकेश्वर, चन्द्रादित्येश्वर, स्वप्नेश्वर, त्रिविष्टपेश्वर, अनादिकल्पेश्वर, स्वर्गद्वारेश्वर, नूपुरेश्वर, रामेश्वर, : मेघनादेश्वर, स्थावरेश्वर, राजस्थलेश्वर, सौभाग्येश्वर, सिद्धेश्वर, महालयेश्वर, मुक्तेश्वर, नागचंद्रेश्वर, प्रतिहारेश्वर, इशानेश्वर, कलकलेश्वर, अप्सरेश्वर इन्द्रध्युम्नेश्वर पुष्पदंतेश्वर कुटुम्बेश्वर , अभिमुक्तेश्वर रुपेश्वर घंटेश्वर रेवन्तेश्वर वीरेश्वर ब्रह्मेश्वर कर्कटेश्वर विश्वेश्वर सुलेश्वर ओंकारेश्वर अभयेश्वर सोमेश्वर कपालेश्वर इंद्रेश्वर आनंदेश्वर जल्पेश्वर पशुपत्तेश्वर प्रयागेश्वर धनुसहस्त्रेश्वर कंटेश्वर/नीलकंठेश्वर सिंहेश्वर हनुमंतेश्वर लम्पेश्वरव् करभलेश्वर सिद्धेश्वर बड़लेश्वर कन्थडेश्वर गंगेश्वर उत्तरेश्वर अंगारेश्वर कुंडेश्वर मार्कंडेश्वर शिवेश्वर कुसुमेश्वर अक्रुरेश्वर द्वारपालेश्वर कायावरोहणेश्वर बिल्बकेश्वर दुर्दरेश्वर खंडेश्वर पत्त्नेश्वर अनकेर्रेश्वर जटेश्वर च्यवनेश्वर त्रिलोचनेश्वर गौमातंगेश्वर
और एक विशेष बात और !
विश्व की एक मात्र उत्तर दिशा में प्रवाह मान क्षिप्रा नदी उज्जैन में ही है।


उज्जैन के शमशान को भी तीर्थ का स्थान प्राप्त है ।
चक्र तीर्थ
यहाँ सूर्यास्त के बाद भी दाह संस्कार होते हैं |
चक्र तीर्थ
यहां नौ नारायण और सात सागर हैं जिनका विवरण ऊपर दिया ही जा चुका है |
उज्जैन नगर भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली है।आचार्य संदीपनि का गुरुकुल यहीं था ,महाभारत काल में |

महाभारत की एक कथानुसार उज्जैन स्वर्ग है।
उज्जैन विश्व का एक मात्र स्थान है जहाँ अष्ट चिरन्जीवियों का मंदिर है।
यह वह 8 देवता है जिन्हें अमरता का वरदान है
ये मंदिर है उज्जैन का बाबा गुमानदेव हनुमान अष्ट चिरंजीवी मंदिर
भारत भूमि पर जन्मे ये 8 महामानव सदियों से चिरंजीवी हैं –
अश्वथामा बलिव्यासो हनुमानश्च विभीषणः ! कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः !!
अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि|
अष्ट चिरंजीवी मंदिर में इनकी मूर्तियाँ हैं |

ऐतिहासिक महत्त्व

विक्रमादित्य को जानते हैं ?
सम्राट विक्रमादित्य ?
भारत के सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध सम्राट विक्रमादित्य उज्जयिनी के ही राजा थे जिनकी लोकगाथायें आज भी विद्यमान हैं और उनके नवरत्नों में से एक भारत के सबसे बड़े साहित्यकार ,कवि और नाटककार महाकवि कालिदास की जन्मभूमि और कर्मभूमि उज्जयिनी ही थी। यही वो स्थान है जिसने हमें महाकवि कालिदास दिये, जिन्होंने अभिज्ञान शाकुंतलम जैसे अद्भुत ग्रन्थ की रचना की |
भारत को सोने की चिड़िया का दर्जा यहां के राजा विक्रमादित्य ने ही दिया था इनके राज्य में सोने के सिक्के चलते थे सम्राट राजा विक्रमादित्य के नाम से ही विक्रम संवत का आरंभ हुआ जो हर साल चैत्र माह के प्रति प्रदा के दिन मनाया जाता है ।

ज्योतिष शास्त्र में उज्जयिनी का महत्त्व

ज्योतिष शास्त्र में उज्जयिनी का महत्त्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उज्जयिनी नगरी मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थान है।
उज्जैन से ही ग्रह नक्षत्र की गणना होती है|
कर्क रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है
और तो और हिन्दू प्रचलित मान्यताओं के अनुसार पूरी दुनिया का केंद्र बिंदु (Central Point) है महाकाल जी का मंदिर
“अकाल मृत्यु वो मरे ,जो कर्म करे चांडाल का।
काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का।”

कीर्ति


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