लाश की कहानी
लाश की कहानीद्वारा - विजयंत खत्री विजय पूरा दिन ड्यूटी करके आ कर, खाना खा कर, नहा कर बस सोने की तैयारी ही कर रहा था कि फोन की घंटी बजी। फोन उठा कर देखा तो थाने के हेड मोहर्रिर का फोन था। विजय का माथा ठनक गया। ये आज…
लाश की कहानीद्वारा - विजयंत खत्री विजय पूरा दिन ड्यूटी करके आ कर, खाना खा कर, नहा कर बस सोने की तैयारी ही कर रहा था कि फोन की घंटी बजी। फोन उठा कर देखा तो थाने के हेड मोहर्रिर का फोन था। विजय का माथा ठनक गया। ये आज…
आत्महत्या का विचार छोड़ो आपका -विपुल शायद 1992 था।कन्नौज में नुमाइश लगी थी और बरसात का मौसम था।मुझे ट्यूशन के बाद अपने एक दोस्त के साथ उसकी साइकिल पर 3 किलोमीटर दूर जाना पड़ा।कुछ सवाल छूटे थे,गणित की कॉपी उससे लेकर कॉपी करने थे। अगले दिन चेक होनी थी या…