
ब्लैकमेलिंग – एक गंभीर अपराध
आपका – विपुल
ये पूरी लेख ब्लैकमेलिंग के बारे में, उसके शिकार,उससे निपटने के तरीकों के बारे में है।गंभीर बात गंभीर तरीके से।
पहले तो मोटा मोटी ये समझें कि ब्लैकमेलिंग है क्या?
मैं कक्षा 4 में था,जब मैंने अपनी स्वर्गवासी माता जी ने ये सवाल पूंछा था और उन्होंने मुझे बच्चों वाली अंदाज में ही समझाया था।
उन्होंने कहा – “जैसे मानो सामने अलमारी में चार लड्डू रखे हैं जो मैंने कह रखा कि किसी को देने हैं,तुम लोगों को नहीं खाना।पर तुम्हारा मन नहीं मानता और तुम एक लड्डू छुपा कर खा लेते हो।
इस बात को तुम्हारा बड़ा भाई देख लेता है और तुमको धमकाता है कि मैंने देखा है कि तुमने लड्डू खाया है।अगर तुम चाहते हो कि ये बात मैं मम्मी को न बताऊं तो मुझे 5 रुपये दो।इसी चीज को ब्लैकमेलिंग कहते हैं।”
ब्लैकमेलिंग का ये उदाहरण मुझे आज तक बिलकुल वैसे का वैसा ही याद है।

मतलब कुल मिलाकर ब्लैकमेलिंग वहां से ही शुरू होती है जहां से आप समाज या कानून के बनाये नियमों को तोड़ देते हैं और इसके बारे में कोई दूसरा ऐसा व्यक्ति जान जाता है जो आपराधिक मानसिकता का है और आपके धन या तन में से कुछ लेना चाहता है। ब्लैकमेलिंग की शुरुआत 99 प्रतिशत बार आदमी की अपनी गलतियों से होती है जो उससे जाने या अनजाने में हुई हों।
एक प्रतिशत ब्लैकमेलिंग के मामले जरूर ऐसे होते हैं जिनमें ब्लैकमेलिंग के शिकार की कोई गलती नहीं होती जैसे किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या डीपफेक टेक्नोलॉजी से अनजान किसी युवती या महिला के अपनी ही मॉर्फ्ड तस्वीरों के झांसे में आकर शिकार हो जाना।या किसी पति पत्नी के अंतरंग क्षणों को कोई गुप्त कैमरे से रिकॉर्ड कर ले।

वैसे 99 प्रतिशत ब्लैकमेलिंग के शिकार वोही होते हैं जिन्होंने कुछ ऐसा किया होता है जो कानूनी या सामाजिक तौर पर मान्य नहीं है।
अब अगर आपने कुछ ऐसा किया है जो सामाजिक या कानूनी तौर पर मान्य नहीं है तो कहीं न कहीं उसके निशान जरूर छूटे होंगे।और निश्चित तौर पर ये निशान किसी न किसी को मिले जरूर होंगे।
अगर वो व्यक्ति जिसको ऐसी किसी असामाजिक या गैर कानूनी गतिविधियों के साक्ष्य मिल गये वो व्यक्ति अपराधी प्रवृत्ति का है तो ब्लैकमेलिंग की शुरुआत हो जाती है।
अब होता क्या है?किसी व्यक्ति के पास कोई ऐसा फोन कॉल ,चिट्ठी पत्री आती है कि आपके किसी आपराधिक कृत्य का हमारे पास साक्ष्य है या किसी महिला के पास फोन आता है कि आपकी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें हमारे पास हैं तो वो पुरुष या महिला मानसिक रूप से विचलित हो जाता है और ब्लैकमेलर के झांसे में आ जाता है।

ऐसे समय में करना तो ये चाहिये कि इस बात को तुरंत अपने माता पिता भाई बहन या जो भी घर का बड़ा हो उसे बता देना चाहिये और दूसरा कदम तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दे देना चाहिये।
पर ऐसा 90 प्रतिशत लोग करते नहीं।वो अपने दम पर अपने सामने आई समस्या से निपटने की सोचते हैं।लोकलाज और अपनी सामाजिक छवि बचाने का ख्याल उन पर हावी हो जाता है और वो अपने स्तर पर ब्लैकमेलिंग से निबटने का प्रयास करते हैं जो कि शत प्रतिशत बार असफल ही होता है।पैसे भी जाते हैं और कई बार लड़कियों की इज्जत भी।
एक बड़े पुलिस अफसर ने एक बार अनौपचारिक बातचीत में मुझसे ये बात बोली कि ब्लैकमेलिंग जैसी समस्या को आप अकेले अपने दम पर नहीं सुलझा सकते।आपको अपने परिवार को और पुलिस को इन्वॉल्व करना ही होगा।
अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो इसके अंतिम परिणाम केवल दो ही स्वरूपों में सामने आते हैं।पहला आत्महत्या और दूसरा पागलपन।क्योंकि एक सामान्य इंसान बहुत ज्यादा मानसिक तनाव नहीं झेल सकता।एक स्थिति ऐसी आयेगी कि ब्लैकमेलर से आर्थिक शारीरिक और मानसिक शोषण झेलता इंसान मानसिक तनाव के उस चरमबिंदु पर आ जायेगा कि वो हत्या या आत्महत्या जैसे कदम उठा लेगा या पागल हो जायेगा।
यकीन मानिये ऐसे लोग जो अपने साथ हो रही ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं के बारे में नहीं बताते हैं,उनका अंतिम परिणाम यही होता है।

आप कई बड़े और मंझे हुये अनुभवी पुलिस अधिकारियों के साथ कभी इस संबंध में लंबी बात करेंगे तो वो आपको बतायेंगे कि अगर ब्लैकमेलिंग का शिकार व्यक्ति अपने घर और अपनी पुलिस को पूरी बात सच सच बता दे तो 90 प्रतिशत बार बहुत आसानी से और पीड़ित व्यक्ति की गोपनीयता का ख्याल रखते हुये मामले पीड़ित के पक्ष में निपट जाते हैं।पर दिक्कत ये होती है कि आमतौर पर हर व्यक्ति अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और अपनी छवि का ख्याल करते हुये पूरी बात सच सच नहीं बताता और मामला बिगड़ता जाता है।
महिलाओं के साथ ये दिक्कत ज्यादा होती है क्योंकि भारतीय समाज आम तौर पर यौन से जुड़े किसी भी मामले में महिला की ही गलती मानता है और हर आम भारतीय महिला को इस बात से डर लगता है कि उसके बारे में कुछ ऐसी वैसी बात,फोटो,वीडियो वायरल हो गया जिसमें वो आपत्तिजनक अवस्था में हो तो उसका जीना दूभर हो जायेगा और शायद उसे अपना गांव शहर,टोला मोहल्ला या शायद दुनिया ही छोड़नी पड़ जाये।
पर इस संबंध में एक और बड़े पुलिस अधिकारी ने एक बात कही है जिससे मैं पूरी तरह सहमत हूं।साइबर क्राइम्स पर नये रंगरूटों की क्लास लेते समय उन्होंने कहा था कि -“अगर किसी लड़की को कोई ये कहकर ब्लैकमेल करने का प्रयास करता है कि उसका कोई आपत्तिजनक फोटो या वीडियो उसके पास है और वो लड़की उस ब्लैकमेलर के झांसे में आकर उससे मिलने चली जाती है तो भले ब्लैकमेलर के पास उस लड़की का पहले का कोई वीडियो न हो,अब जरूर बन जायेगा।”

वर्तमान युग में जिस तरह के अपराध और साइबर अपराध चल रहे हैं, कम उम्र की ऐसी लड़कियां ऐसे ब्लैकमेलर्स का सॉफ्ट टारगेट होती हैं जो सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय होती हैं।इस उम्र में ज्यादातर लड़कियां हवा में उड़ती हैं और सोशल मीडिया की दुनिया को ही असली दुनिया मान लेती हैं।उन्हें भान ही नहीं होता कि असली दुनिया के खतरनाक यौन दरिंदे यहां टाल डार्क और हैंडसम जेंटलमैन बने बैठे हैं इंस्टाग्राम पर।
अमूमन कई बार कुछ लड़कियां अपने तथाकथित बॉयफ्रेंड के साथ कुछ आपत्तिजनक फोटोज खिंचवा लेती हैं या उन्हें खुद ही अपनी फोटोज भेज देती हैं।आगे ये उनके लिये परेशानी का सबब बनता है।
मैं समाज सुधारक नहीं हूं न ही कोई साधु महात्मा जो आपको क्या करें और क्या न करें की बात बताऊंगा।
मैं अपनी मूल बात पर आऊंगा जो कि मैं हमेशा कहता आया हूं।
इस दुनिया में गलतियां सबसे होती हैं ये फरिश्तों की दुनिया नहीं है।पर अगर कोई आपकी गलतियों का फायदा उठा कर आपका आर्थिक या शारीरिक शोषण करना चाहे तो उसे इसकी इजाजत मत दीजिये।थोड़ा बेशर्म बनिये और थोड़ा अपने परिवार और पुलिस से मदद लीजिये।

आप ब्लैकमेलिंग जैसी समस्या से अपने आप अपने दम पर नहीं निपट सकते।कोई भी ब्लैकमेलिंग जैसी समस्या से अकेले दम नहीं निपट सकता।आपको सहायता लेनी ही चाहिये अपने परिवार और पुलिस से।
और आपको शायद ये सुनने में थोड़ा अजीब लगे क्योंकि पुलिस की छवि आमजन में अच्छी नहीं है, पर वास्तविकता में कहीं की भी पुलिस हो, वो ब्लैकमेलिंग, विशेषतौर पर महिलाओं से हुई ब्लैकमेलिंग के मामले अपने स्तर पर बहुत अच्छे से निपटा देती है।इतने अच्छे स्तर पर कि किसी को भनक भी नहीं होती।महिला हेल्प डेस्क केवल दिखावे भर की नहीं है।

अंत में मेरा यही कहना है कि अगर आपके सामने ब्लैकमेलिंग जैसी कोई समस्या कभी आती है तो पहली बार में ही अपने परिवार को बतायें और पुलिस से मदद लें।शत प्रतिशत बार पुलिस आपको ऐसी समस्या से बड़े आराम से मुक्ति दिलवा देगी।
पर आपको पूरी बात सच सच बतानी होगी और बताने में कोई हर्ज भी नहीं।क्योंकि न आप साधु महात्मा हैं और न ये दुनिया ही साधु महात्माओं की है।
बेशर्म बनें,बेबाक बनें,अपनों को अपनी समस्या बतायें और पुलिस से मदद लें।
ब्लैकमेलिंग की समस्या आराम से सुलझ जायेगी।रही बात सामाजिक छवि की ,बदनामी की तो फिर अमर प्रेम फिल्म के सदाबहार गाने की वो यादगार लाइन मन में दोहरा लें।
-“तू कौन है,तेरा नाम है क्या?
सीता भी यहां बदनाम हुई।”
धन्यवाद!
विशेष – भारतीय कानून के अनुसार ब्लैकमेलिंग के लिए 308(2) बीएनएस धारा है जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
महिला अपराध की धारायें अलग से हैं।
आपका -विपुल
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