Vividh

हे मनुज सत्य स्वीकार करो !

हे मनुज सत्य स्वीकार करो, यह जीवन एक तपस्या है, जो समाधान का अंग नहीं, वह जीवन एक समस्या है। है परमेश्वर का वचन यही, सब ग्रन्थों की यह शिक्षा है, जो करे अनीति विरोध नहीं, वह खुद अनीति का हिस्सा है। कब भला सत्य ने जय पायी, केवल शांति…

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डिप्रेशन हल्की चीज नहीं है

डिप्रेशन हल्की चीज नहीं हैप्रस्तुति - विजयंत खत्रीसोशल मीडिया पर लोगों ने डिप्रेशन शब्द को इतना हल्का बना दिया है कि सब अपने आप को डिप्रेशन में ही कहने लगे है, जैसे ये कोई फैशन हो।डिप्रेशन हल्की चीज नहीं हैअरे भाई डिप्रेशन और सैडनेस में अन्तर होता है।डिप्रेशन एक गंभीर…

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बदले की आग

लघुकथा -विजयंत खत्री ​खेतों की हरी-भरी शांति में, जहाँ हवा सरसराती हुई फसलों के बीच से गुजर रही थी, बसंत अपनी चारपाई पर बैठा था। उसका चेहरा ढलते सूरज की रोशनी में चमक रहा था, लेकिन उसकी आँखों में एक अंधेरा था जो खेतों की हरियाली से मेल नहीं खाता…

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जिंदा रहना सबसे जरूरी है।

जिंदा रहना सबसे जरूरी है।आपका - विपुल ये गंभीर है।लगभग दो साल पहले मेरी एक ऐसे विकलांग से लड़ाई हुई जिसके एक हाथ एक पैर नहीं है।डंडे से चलता है। शक्ल सूरत और आवाज खराब है। दो तीन बीघा खेती होगी।लड़ाई इतनी ज्यादा हुई कि थाने की दो जीप भर…

Comedy Haasya Vyangya

ब्रा ब्रा साहब

ब्रा ब्रा साहबलघुकथा प्रस्तुति -विपुलकहानी चुरू से शुरू हुई जहां मैं गणित का युवा लेक्चरर विपुल अपने कॉलेज के प्रिंसिपल रमाकांत जी के लिये नोएडा से असली बासमती चावल लेने पहुंचा था।बस में एक युवा सा दिखता वृद्ध व्यक्ति अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था और" वाह राहुल" बोल…