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विपुल मिश्रा 

विपुल मिश्रा

वर्ष 2026 प्रारंभ हो चुका है |2000 से 2025 तक एक चौथाई सदी गुजर चुकी है |25 साल बड़ा वक्त होता है किसी भी क्षेत्र का इतिहास बताने के लिये|चूंकि मैं एक क्रिकेट प्रेमी हूँ तो आपको क्रिकेट की बात ही बताऊंगा पिछले 25 सालों की |पिछले 25 सालों में भारतीय क्रिकेट ने तमाम उतार चढाव देखे हैं |ऑस्ट्रेलिया के दानवों के खिलाफ चमत्कारिक और अप्रत्याशित  टेस्ट जीत से लेकर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घर में टेस्ट सीरीज में सम्पूर्ण सफाये तक |

पर बात अच्छी अच्छी बातों की ही करेंगे और बात सिर्फ भारतीय क्रिकेट की उपलब्धियों की ही करेंगे हम |

शुरू करें ?

2001 की अविस्मरणीय टेस्ट सीरीज जीत 

2001 की अविस्मरणीय टेस्ट सीरीज जीत 

स्टीव वॉग वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम शायद पिछले 30-35 सालों की सबसे खतरनाक टीम थी |उस ऑस्ट्रेलियाई टीम का एक एक खिलाड़ी सिर्फ खतरनाक ही  नहीं ,खूंख्वार सा था | उस टीम की ताकत का ऐसे अंदाजा लगायें कि डेमियन मार्टीन सा जबरदस्त बल्लेबाज़ टीम में स्थाई ज़गह बना  पाने में सफल नहीं हो पा रहा था और स्टुअर्ट मैकगिल सा क्लास लेग स्पिनर कभी कभार खेल पाता था |गिलक्रिस्ट सा धुरंधर बल्लेबाज़  उस टीम में नंबर 7 से ऊपर बल्लेबाजी करने नहीं आ पाता था और कास्प्रोविच सा बॉलर उनकी फर्स्ट सेकंड छोडो थर्ड चॉइस भी नहीं था|

ऐसी खूंख्वार ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम लगातार 15 टेस्ट जीत कर भारत के  दौरे पर आई |ऑस्ट्रेलियाई टीम में ब्रेट ली नहीं थे जो उनके लिये ज्यादा चिंता की बात नहीं थी पर भारत की टीम में अनिल कुंबले नहीं थे जो भारत के सबसे बड़े मैच विनर थे तब |

पहला मैच मुंबई में हुआ और स्टीव वॉग की ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सौरव गांगुली की भारतीय टीम को बुरी तरह रौंद दिया |सचिन के दोनों पारियों में अर्धशतक कोई काम नहीं आये थे और कोढ़ में खाज ये  कि भारत के प्रीमियम फ़ास्ट बॉलर जवागल श्रीनाथ भी अगले दोनों मैच खेलने की स्थिति में नहीं थे |

कोलकाता के ईडन गार्डन में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच भारतीय टेस्ट टीम की दिशा और दशा बदलने वाला रहा |

ऑस्ट्रेलिया के पहले पारी में 445 के स्कोर के जवाब में भारत की टीम पहली पारी में मात्र 171 रन ही बना पाई और फॉलोऑन खा गई |बस वीवीएस लक्ष्मण के अलावा कोई और भारतीय बल्लेबाज़ अर्धशतक नहीं लगा पाया था|

फॉलोऑन  के बाद दूसरी पारी में 52 रन पर भारत का पहला विकेट गिरा और वीवीएस लक्ष्मण  नंबर 3 पर आये |

बस यहीं से इतिहास बनना शुरू हुआ |

इस मैच में लक्ष्मण ने 281 रन बनाये ,द्रविड़ ने 180|हरभजन ने हैटट्रिक के साथ कुल 13 विकेट लिये|तेंदुलकर ने दूसरी पारी में कुल 3 विकेट लिये और द्रविड़ और लक्ष्मण ने एक पूरे दिन बल्लेबाजी की थी बिना आउट हुये|

भारत ने ये टेस्ट मैच 171 रनों से जीता और अगला चेन्नई टेस्ट 2 विकेट से जीत कर सीरिज 2-1 से जीत ली |

ये जीत इतनी बड़ी थी कि आज भी इसे पिछले 25 सालों की सबसे बड़ी टेस्ट सीरीज  जीत माना जा सकता है |

2003- 2004 का भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा 

2003- 2004 का भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा 

ये भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा 2003- 2004 इस लिस्ट में क्यों है ?

भाई 1981 के बाद से भारत ने एक भी टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया की धरती पर नहीं जीत पाया था |1985-1986 की टेस्ट सीरीज 0-0 से ड्रा रही थी |1991 -1992 में भारत 0 -4 से हारा था और 1999 में 0-3 से |

इस टेस्ट सीरिज में भी शेन वार्न मैक्ग्राथ की अनुपस्थिति में भी भारत सौरव गांगुली के शानदार शतक के बावजूद सीरीज का पहला मैच ड्रा ही करा पाया था |दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने सवा दिन में ही रिकी पोंटिंग के दोहरे शतक की सहायता से 556 रन बना डाले थे |तब मोर्चा सम्भाला था ईडन गार्डेन 2001 के ऐतिहासिक टेस्ट मैच के दोनों भारतीय बल्लेबाज नायकों ने |

राहुल द्रविड़ ने 233 रन बनाये थे और वीवीएस लक्ष्मण ने 148|दोनों ने 303 रनों की साझेदारी की |द्रविड़ जब सबसे अंत में आउट हुये तब भारत का स्कोर 523 हो चूका था और लीड मात्र 33 रनों की |

दूसरी पारी में अजीत अगरकर ने बेहद शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुये मात्र 41 रन देकर 6 विकेट ले लिये और ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में मात्र  196 रन बना कर आल आउट हो गई |

भारत को जीत के लिये 230 रनों का टार्गेट मिला और राहुल द्रविड़ ने नॉटआउट 72 रन बनाते हुये भारत को ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर 1981के बाद से पहला टेस्ट मैच जिता दिया |

इसके अगला टेस्ट मैच भारत वीरेन्द्र सहवाग के शानदार 195 रनों के बावजूद हारा।सीरीज का अंतिम चौथा मैच सचिन तेंदुलकर की ऐतिहासिक बिना कवर ड्राइव वाली 241 रनों की पारी के बावजूद ,स्टीव वॉग के अपने अंतिम टेस्ट मैच में टेस्ट सीरीज भारत जीत नहीं पाया। ड्रा से ही सन्तोष करना पड़ा पर उस ऑस्ट्रेलियाई टीम के विरुद्ध उसके घर में  ही भारतीय टीम को इतना चढ़ कर खेलते देखना भी एक बहुत बड़ी बात थी कि ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम अपने घर में ही हार बचाती दिखे |

2004  का भारत का पाकिस्तान दौरा 

2004  का भारत का पाकिस्तान दौरा 

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 2004 के पहले भारत ने पाकिस्तान के 5 दौरे ऐसे किये थे जहां भारत पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच हुये थे पर भारत ने कभी भी पाकिस्तान में कोई भी टेस्ट मैच नहीं जीता था |

यहाँ पहले भारत ने पाकिस्तान से 3-2 से एकदिवसीय सीरीज जीती फिर पहले ही टेस्ट में सौरव गांगुली की गैर मौजूदगी में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में खेलते हुये वीरेंद्र सहवाग के 309 और सचिन तेंदुलकर के नाबाद 194 रनों की मदद से 675 रनों का पहाड़ खड़ा करके पाकिस्तान को एक पारी और 52 रनों से हराया |

दूसरा टेस्ट मैच भी द्रविड़ की कप्तानी में ही खेला गया  और पहली पारी में  युवराज सिंह के शतक के बाद दूसरी पारी में सहवाग के 90 रनों के बावजूद भारत ये टेस्ट मैच 9 विकेट से हारा |

तीसरे टेस्ट मैच में नियमित कप्तान सौरव गांगुली लौट आये थे और लक्ष्मीपति बालाजी , इरफान पठान और आशीष नेहरा की तेज़ गेंदबाजी तिकड़ी ने जहाँ पाकिस्तान को पहली पारी में 224 रनों पर ही समेत दिया वहीं भारत की पहली पारी में अकेले राहुल द्रविड़ के ही 270 रन थे और पूरी टीम के 600|

पाकिस्तान की दूसरी पारी में बालाजी एंड कम्पनी का साथ अनिल कुंबले ने भी दिया और पाकिस्तान की पूरी टीम 245 पर आल आउट हो गई |भारत ने सीरिज का दूसरा मैच एक पारी और 131रनों से जीता |

आज तक पाकिस्तान में एक भी टेस्ट मैच न जीत पाने वाली भारतीय टीम ने इस दौरे के तीन में से दो टेस्ट मैच पारी के अंतर से जीते थे | 

2007 का भारत का इंग्लैंड दौरा 

2007 का भारत का इंग्लैंड दौरा 

इस चौथाई सदी में भारत की टेस्ट क्रिकेट टीम  ने इंग्लैंड के आधा दर्ज़न दौरे किये पर सीरीज  जीत केवल एक बार  नसीब हुई |2007 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में |

पहला टेस्ट ऐसे शुरू हुआ कि इंग्लैंड के पहली पारी के 298 रनों के ज़वाब में भारत वसीम जाफर के अर्धशतक की मदद से जैसे तैसे 201 रन बना पाया|दूसरी पारी में केविन पीटरसन ने लम्बा शतक जड़ा और भारत को जीत के लिये 380 रनों का लक्ष्य मिला |इस टेस्ट में धोनी की नाबाद 76 रनों की पारी उनकी सबसे अच्छी  टेस्ट पारियों में गिनी जा सकती है जब उन्होंने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारत को निश्चित हार से बचा लिया |इंग्लैंड भारत का अंतिम विकेट नहीं गिरा पाया और मैच ड्रा हो गया |

दूसरा टेस्ट मैच नाटिंघम में खेला गया और इंग्लैंड फिर इस बार पहले खेला |ज़हीर खान ने 4 विकेट लिये और कुंबले ने 3 |इंग्लैंड 198 पर आलआउट हो गया पहली पारी में |

ज़वाब में 5 भारतीय बल्लेबाजों दिनेश कार्तिक ,वसीम जाफर ,सचिन तेंदुलकर ,सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण ने अर्धशतक बनाये|भारत ने 481 रनों का स्कोर खड़ा कर इंग्लैंड पर बहुत लम्बी लीड ले ली |

इंग्लैंड दूसरी पारी में माइकल वॉन के शतक 155 रनों के बावजूद 355 रन ही बना पाया |भारत को जीत के लिये 73 रन बनाने थे जो भारत ने 3 विकेट खोकर बना लिये|राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली नाबाद रहे |

ओवल में खेले गये तीसरे टेस्ट मैच में भारत पहले खेला  और पहली पारी में 664 रन बना डाले |दिनेश कार्तिक के 91, सचिन के 82 और धोनी के 92 से बड़ा आकर्षण इस पारी में अनिल कुंबले के कैरियर का एकमात्र टेस्ट शतक था |ज़वाब में इंग्लैंड पहली पारी में 345 रन बना पाया |कुंबले ने 3 विकेट भी लिये थे |भारत ने अपनी दूसरी पारी 180/6 पर घोषित कर दी जहाँ सौरव गांगुली ने अर्धशतक लगाया था |इंग्लैंड ने केविन पीटरसन के शतक और इयान बेल के अर्धशतक से अच्छा प्रतिरोध किया |भारत इंग्लैंड के मात्र 6 विकेट ही गिरा पाया और मैच ड्रा हो गया |

भारत ये टेस्ट सीरीज 1-0 से जीता |इसके बाद आज तक भारत इंग्लैंड में कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया है |

2007 टी 20 विश्वकप 

2007 टी 20 विश्वकप 

मार्च अप्रैल 2007 का एकदिवसीय  विश्वकप भारत केवल हारा ही नहीं था बल्कि बेईज्ज़त होकर हारा था |पहले राउंड में ही बाहर थी टीम इण्डिया |

इसी साल आईसीसी ने अपने प्रारूप टी 20 का पहला विश्वकप सितंबर में आयोजित किया और एकदिवसीय विश्वकप की शर्मनाक हार से उबर न पाये सचिन द्रविड़ गांगुली कुंबले ज़हीर जैसे बड़े खिलाडियों ने इस प्रारूप में खेलने में कोई रूचि न दिखाई थी |तब भारतीय टीम के नये नवेले स्टार विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में एक ऐसी टीम दक्षिण अफ्रीका भेजी गई जिसके सीनियर खिलाड़ी युवराज सिंह हरभजन सहवाग और अजीत अगरकर थे वहीं रोहित शर्मा जोगिन्दर सिंह और युसूफ पठान को डेब्यू करने का मौका मिला था |

भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की रूचि इस टूर्नामेंट में तब जगी जब भारत पाकिस्तान का पहला लीग मैच रोमांचक तरीके से टाई होने के बाद भारत ने बॉल आउट में हरभजन सहवाग और उथप्पा की बल्लेबाजी से जीता |युवराज सिंह के स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में लगाये छः छक्कों के बाद सेमीफाइनल में युवराज के 12 गेंदों वाले पचासे ने समां बाँधा वहीं इसी सेमीफाइनल में श्रीसंथ के हैरतंगेज़ गेंदबाजी स्पेल के बाद भारतीय टीम की आक्रामकता ने भारत को जैसी जीत दिलाई वो यादगार थी |

फाइनल में भारत का सामना फिर पाकिस्तान से था |घायल सहवाग की ज़गह आये युसूफ पठान और गौतम गंभीर ने ठीक ठाक सलामी साझेदारी की ,गंभीर के बाद रोहित ने भी  बल्लेबाजी में कुछ  अच्छे हाथ दिखाये और टी 20 विश्वकप का पहला ख़िताब जीतने को पाकिस्तान के सामने 158 रनों का लक्ष्य रखा |

उस रोज़ श्रीसंथ और हरभजन  बेरंग थे पर आर पी सिंह और इरफान पठान पीछे हटने के मूड में नहीं थे |

अंतिम ओवर में पाकिस्तान को जीतने के लिये 13 रन बनाने थे एक विकेट बाकी था, स्ट्राइक पर मिस्बाह उल हक़ थे और धोनी ने एक जुआ खेलते हुये अंतिम ओवर फेंकने की ज़िम्मेदारी हरभजन की ज़गह जोगिन्दर शर्मा को दे दी जो लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद फेंकने का प्रयास कर रहे थे |एक छक्का खाने के बाद भी जोगिन्दर शर्मा ने लाइन नहीं बदली जिसका फायदा भी उन्हें मिला और मिस्बाह एक अटपटा शॉट खेलने के प्रयास में श्रीसंथ को कैच थमा बैठे|भारत ये फाइनल मैच 5 रनों से जीता |

भारत ने पहला आईसीसी टी 20 विश्वकप धोनी की कप्तानी में जीता और भारत का 1983 के बाद ये पहला आईसीसी विश्वकप था | 

2009 का भारत का न्यूजीलैंड दौरा 

2009 का भारत का न्यूजीलैंड दौरा 

भारत ने आज तक मात्र दो बार  न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरीज जीती हैं |पहली बार 1967-68  में और दूसरी बार 2009 में |

सीरीज का पहले टेस्ट में ईशांत शर्मा ने पहली पारी में 4 और मुनाफ पटेल ने 3 विकेट लेकर न्यूजीलैंड को पहली पारी में 279 रनों पर रोक दिया | 

ज़वाब में सचिन तेंदुलकर के 160 के साथ  गंभीर द्रविड़ और ज़हीर  खान ने पचासे बनाकर भारत का  पहली पारी का स्कोर 520 पहुंचा दिया |न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में हरभजन ने 6 विकेट लिये और भारत को जीत के लिये मात्र 39 रन बनाने थे जो भारत ने बिना विकेट खोये बनाकर सीरीज का पहला टेस्ट मैच 10 विकेट से जीत लिया |

सीरीज के दुसरे टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 619 रन बना दिये|

भारत को पहली पारी में फॉलोऑन मिला पर दूसरी पारी में गौतम गंभीर और वीवीएस लक्ष्मण ने शतक बनाकर भारत की हार टाल के मैच ड्रा करवा लिया |

सीरीज के तीसरे मैच में सचिन धोनी  और हरभजन ने अर्धशतक बनाये

और   ज़हीर खान ने पहली पारी में 5 विकेट लिये|

दूदरी पारी में गंभीर ने शतक बनाया वहीं धोनी और द्रविड़ ने अर्धशतक|

ये मैच न्यूजीलैंड रोस टेलर के शतक और जेम्स फ्रैंकलिन के171 गेंदों पर बनाये गये 49 रनों की मदद से किसी तरह से ड्रा करा ले गया |

भारत न्यूजीलैंड में ये टेस्ट सीरीज 1-0 से जीता और इसके बाद भारत अभी तक न्यूजीलैंड में कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया है |

2011 एकदिवसीय विश्वकप

2011 एकदिवसीय विश्वकप

2011 का एकदिवसीय विश्वकप भारत में ही होना था और इसके लिये भारतीय टीम की कमान धोनी के ही हाथों में थी |प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाज़ रोहित शर्मा को अपने ख़राब फॉर्म की कीमत इस टीम से बाहर होकर चुकानी पड़ी|विराट कोहली इस टीम में आ गये थे और युसूफ पठान भी |

ये एक ऐसी टीम थी जिसमें केवल गौतम गंभीर को छोड़ कर शेष सभी बल्लेबाज़ कुछ ओवर फेंक सकते थे |

इस विश्वकप अभियान की शुरुआत भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ जीत से की जिसमें वीरेन्द्र सहवाग और विराट कोहली ने शतक मारे थे|

भारत अपने इस अभियान में मात्र इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नहीं जीत पाया था|इंग्लैंड के खिलाफ मैच टाई रहा था और दक्षिण अफ्रीका से भारत हारा था |दिलचस्प ये रहा था कि दोनों ही मैचों में सचिन के शतक आये थे|

सेमीफाइनल तक के सफ़र में युवराज सिंह की हरफनमौला प्रतिभा और ज़हीर खान की धारदार तेज़ गेंदबाजी का प्रीमियम रूप देखने को मिला था |

पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में सचिन  की जिंदगी की सबसे भद्दी पारी ,रैना की आतिशबाजी और भारतीय गेंदबाजों औरर क्षेत्ररक्षकों के अच्छे प्रदर्शन से हम जीते जिसके बाद फाइनल मुकबला श्रीलंका से था |

फाइनल में ज़हीर खान के शुरूआती ओवरों में श्रीलंकाई बल्लेबाज़ बेबस से नजर आ रहे थे और रही सही कसर युवराज और रैना की फील्डिंग पूरीकर रही थी |

महेला जयवर्धने के शतक की बदौलत श्रीलंका ने बाद में मोमेंटम पकड़ा और थिसारा परेरा की आतिशबाजी से भारत को 275 रन बनाने का टार्गेट मिला |

सहवाग दूसरी ही गेंद पर निकल गये और सचिन सातवें ओवर में |तब गौतम गंभीर और विराट कोहली ने मोर्चा संभाला |’114 के स्कोर पर कोहली दिलशान को उनकी ही गेंद पर कैच थमा बैठे और तब बैटिंग प्लान में थोड चेंज करते हुये एम् एस धोनी युवराज की ज़गह नंबर 5 पर आये और भारत को जीत दिलाने तक नाबाद रहे |

धोनी ने नाबाद 91 और गंभीर ने 97 रन बनाये थे |

भारत ने 1983 के बाद दूसरा आईसीसी एकदिवसीय विश्वकप जीता  था वहीं धोनी की बतौर कप्तान ये दूसरी आईसीसी ट्रॉफी थी |

2013 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी

2013 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी

जून 2013 में आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी इंग्लैंड में हुई और भारत के ग्रुप में दक्षिण अफ्रीका वेस्टइंडीज़ और पाकिस्तान थे |अपने गैर परम्परागत फैसलों के लिये मशहूर रहे भारतीय कप्तान एम् एस धोनी ने इस टूर्नामेंट में  दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के टूर्नामेंट के पहले ही मैच में रोहित शर्मा को ओपनिंग में शिखर  धवन के साथ उतार दिया|

भारत ने धवन के शतक और रोहित के अर्धशतक की सहायता से 331 रन बनाये और दक्षिण अफ्रीका को 26 रनों से हराया|अगला मैच  वेस्टइंडीज़ के खिलाफ था|

भारत फिर जीता |फिर से धवन का शतक और रोहित का अर्धशतक था|

पाकिस्तान के खिलाफ भारत डकवर्थ लुईस सिस्टम से वर्षा प्रभावित मैच में जीता और सेमीफाइनल में श्रीलंका के ऊपर 8 विकेट की जीत में धवन और कोहली के अर्धशतक थे |

इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल वर्षा के कारण 20-20 ओवरों का हुआ|

भारत ने धवन के 31, कोहली के 43 और रवीन्द्र जडेजा के नाबाद 33 रनों की मदद से पहले खेलते हुये 129 रन बनाये|

इंग्लैंड ने को अंतिम 18 गेंदों में 28 रन बनने थे , 6 विकेट बाकी थे पर इशांत शर्मा के फेंके 18 वें ओवर में मॉर्गन और बोपारा के दो क्रीज़ पर लम्बे समय से टिके बल्लेबाज़ आउट हुये फिर रवींद्र जडेजा के फेंके 19 वें ओवर में बटलर और ब्रेसनन आउट हुये|

अंतिम ओवर में अश्विन को 14 रन बचाने थे|अश्विन ने मात्र 9 रन दिये|भारत ने ये मैच 5 रनों से जीता और भारत ने पहली बार आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी एकल रूप से जीती |

एम् एस धोनी की कप्तान के तौर पर ये तीसरी आईसीसी ट्राफी थी |

2018-19 भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा 

2018-19 भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा 

2018-19 भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के लिये एक अप्रत्याशित खुशी सा था |

पहले टेस्ट मैच के पहले दिन, खेल  के  अंतिम पलों में पैट कमिंस के सटीक थ्रो पर रन आउट होने के पहले चेतेश्वर पुजारा ने ऐसी यादगार शतकीय पारी खेली कि भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने दांतों तले  उँगलियाँ दबा लीं |पहली पारी में भारत के 250 रनों में से पुजारा के कुल 123 रन थे |बुमराह एंड कम्पनी ने अपनी गेंदबाजी से भारत को 35 रनों की  बढ़त भी दिलवा दी|दूसरी पारी में फिर पुजारा के 204 गेंदों में 71 रन थे |

ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में 323 रन बनाने थे और वो ये मैच 31 रनों से हारा |

दूसरा टेस्ट मैच पर्थ की तेज़ पिच पर हुआ और कप्तान विराट कोहली यहाँ चूक कर गये,उन्होंने एक भी मुख्य स्पिनर नहीं खिलाया |कोहली के पहली पारी में शतक के बावजूद भारत ये मैच 146 रनों से हारा जहाँ मैन ऑफ़ द मैच पहली पारी में 5 औरर दूसरी पारी में 3 विकेट लेने वाले ऑफ़ स्पिनर नाथन लोयन रहे|

तीसरे टेस्ट मैच में डेब्यू करने वाले ओपनर मयंक अग्रवाल और विराट कोहली के अर्धशतकों के साथ पुजारा के 319 गेंदों पर106 रन भी थे और ऑस्ट्रेलियाई  अब क्रीज़ पर पुजारा को देख कर ही चिढने लगे थे |

भारत के 443 के ज़वाब में ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में151 ही बना पाया |दूसरी पारी भारत की भी बकवास ही थी पर भारत ये मैच 137 रनों से जीत ही गया |

चौथे टेस्ट मैच में पुजारा और पन्त के शतक से भारत ने पहले खेलते हुये 600 रन बनाये ऑस्ट्रेलिया को फॉलो ऑन भी खिलाया पर बारिश की वज़ह से ऑस्ट्रेलिया मैच ड्रा करा ले गया |

भारत ही नहीं किसी भी एशियन देश की ये ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट सीरिज जीत थी जो कोहली की कप्तानी में और पुजारा की करामात से आई थी |

2020-21 की गाबा वाली सीरीज 

2020-21 की गाबा वाली सीरीज 

अगर आपको क्रिकेट के मैदान से कोई परीकथा सुनना  पढ़ना हो तो  हो तो भारत का 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया इसके लिये बिलकुल उपयुक्त है |

पहले डे नाईट टेस्ट मैच में पुजारा के 43 ,कोहली के 74, रहाणे  के 42 रनों की मदद से भारत ने जैसे तैसे पहली पारी में 244 रन बनाये और ज़वाब में ऑस्ट्रेलिया ने 191|

यहाँ तक सब ठीक ही था |

पर टेस्ट मैच के तीसरे दिन सुबह सुबह दूसरी पारी में  भारतीय बल्लेबाजी में पतझड़ का मौसम आया|पूरी भारतीय टीम 36 रनों पर आल आउट हो गई|जहाँ सर्वाधिक 9 रन मयंक अग्रवाल के थे |ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से ये मैच जीता|

अगले टेस्ट मैच के पहले कोहली वापस घर जा चुके थे और रहाणे कप्तान थे |

पृथ्वी शॉ की जगह शुभमन गिल टीम में आये और चोटिल मोहम्मद शमी की जगह सिराज |रहाणे की कप्तानी में बुमराह एंड कम्पनी ने ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 195 पर आलआउट  कर दिया फिर रहाणे के शतक रवींद्र जडेजा के अर्धशतक और गिल के 45की मदद से भारत ने 326 रन बना कर ऑस्ट्रेलिया पर 100 से ऊपर की बढ़त ले ली |

दूसरी पारी में भी ऑस्ट्रेलिया जैसे तैसे 200 बना पाया और भारत ने ये मैच 8 विकेट से जीत लिया |

सीरिज के तीसरे मैच में उमेश यादव भी चोटिल होकर बाहर थे और नवदीप सैनी उनकी जगह आये थे |भारत पहली पारी में 90 से ऊपर की लीड खा गया पर दूसरी पारी में रोहित और  गिल की अच्छी साझेदारी  के बाद रहाणे ने पन्त को नंबर 5  पर पुजारा का साथ देने भेजा और पन्त ने ताबड़तोड़ 97 रन बना कर मैच का हुलिया ही बदल दिया|पुजारा के आउट होने के बाद मैच बचाने की ज़िम्मेदारी हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन पर थी जिन्होंने चोटिल होने के बाद भी क्रमशः 161 गेंदों पर 23 और 128 गेंदों पर 39 रनों की नाबाद पारी खेल के मैच ड्रा करा लिया|साथ ही दोनों ने रवींद्र जडेजा को  टूटे अंगूठे के साथ बल्लेबाजी करने आने से रोक दिया|

सीरीज का अंतिम मैच ब्रिसबेन के गाबा मैदान में खेला जाना था जहाँ तीन दशकों से ऑस्ट्रेलिया अविजित थी |

भारत के सारे प्रमुख गेंदबाज़ चोटिल थे|11 खिलाड़ी पूरे करना मुश्किल था |मयंक अग्रवाल जैसे स्थाई ओपनर को भी इसी वज़ह से मध्य क्रम में खिलाना पड़ा|

अंतिम मैच में भारत का गेंदबाजी आक्रमण था तीसरा टेस्ट खेल रहे सिराज ,दूसरा टेस्ट खेल रहे नवदीप सैनी और शार्दुल ठाकुर ,डेब्यू कर रहे वाशिंगटन सुंदर और टी नटराजन |

लेकिन इस गेंदबाजी आक्रमण ने बखूबी अपना काम किया और पहली पारी में ठाकुर नटराजन और सुंदर ने 3-3 और सिराज ने एक विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया को 369 पर रोक दिया |

ज़वाब में 186 पर 6 विकेट गिरने के बाद हरफनमौला वाशिंगटन सुन्दर और शार्दूल  ठाकुर ने करिश्माई साझेदारी करके अपने अपने अर्धशतक पूरे किये और ऑस्ट्रेलियाई लीड को मात्र 33 रनों तक ही रहने दिया |

दूसरी पारी में सिराज ने 5 शार्दूल ने 4 और सुंदर ने एक विकेट लिया ,ऑस्ट्रेलिया 294 बना पाई |

जीत के लिये भारत को 328 रन बनाने थे |रोहित के सस्ते में निकलने के बाद गिल ने ताबड़तोड़ 91रन बनाये|

वहीं पुजारा शायद अपनी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण पारी खेल रहे थे|

रहाणे के आउट  होने के बाद ऋषभ पन्त आये जिन्होंने पुजारा के 211 गेंदों पर 56 रन बना कर आउट होने के बाद गियर बदले और भारत को मैच जिता ही दिया |

सीरीज के पहले टेस्ट में 36 रनों  पर आल आउट होने वाली टीम जिसका सबसे बड़ा बल्लेबाज़ और कप्तान पहले मैच के बाद सीरीज  से बाहर था ,जिसके सबसे बड़े गेंदबाज़ और आल राउंडर निर्णायक मैच से बाहर थे ,जिसे 11 फिट खिलाड़ी ढूंढने मुश्किल थे ,उसने एक नौसिखिये गेंदबाजी आक्रमण के साथ ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरिज जीत के दिखाई थी ,ये क्या किसी परीकथा से कम है ?

2024 टी 20 विश्वकप 

2024 टी 20 विश्वकप 

भारत अपना अंतिम सीमित ओवर विश्वकप 2011 में जीता था और अपना अंतिम टी 20 टी 20 विश्वकप 2007 में |

आईपीएल जैसे बेहद बड़े टी 20 टूर्नामेंट का आयोजन करने वाले देश भारत के लिये ये कम से कम गर्व करने वाली बात तो नहीं ही थी |

रोहित शर्मा और विराट कोहली भी अपनी अंतिम आईसीसी सीमित ओवर ट्राफी भी 2013 में जीते थे|इसलिये अमेरिका और वेस्ट इंडीज़ में आयोजित टी 20 विश्वकप में जब रोहित और विराट खेलने गये तो उनसे बहुत उम्मीद थी की सन्यास के पहले शायद ये कुछ कर के ही जायेंगे|

फाइनल के पहले के मैचों में रोहित चले और फाइनल में विराट |हार्दिक पांड्या अक्षर पटेल लगभग हर मैच में चले ,शिवम् दुबे ने निराश नहीं किया और अर्शदीप सिंह के साथ बुमराह की जुगलबंदी खतरनाक थी|

भारत ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ,सेमीफाइनल में इंग्लैंडमें को हराया  और फाइनल में तो पांड्या अर्शदीप और बुमराह ने दक्षिण अफ्रीका के मुंह से जीत छीन ली |

भारत 2007 के बाद पहली  बार टी 20 विश्वकप जीता और विराट और रोहित ने टी 20 से संन्यास ले लिया |

2025 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी

2025 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी

भारत 2017 के आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल में हारा था और हर भारतीय क्रिकेट फैन की तरह विराट रोहित एंड कम्पनी को भी ये याद ही था |2024-25 के असफल ऑस्ट्रेलिया दौरे को भुलाने की ये अच्छी ज़गह भी थी|

बुमराह इस टीम में नहीं थे और भारत के ग्रुप में बांग्लादेश पाकिस्तान और न्यूजीलैंड थे |

बांग्लदेश के खिलाफ पहले मैच में भारत जीता और गिल ने शतक लगाया |शमी ने 5 विकेट लिये|

पाकिस्तान के खिलाफ दूसरा लीग मैच भी भारत आराम से जीता| 241 रनों का पीछा करते हुये कोहली ने शतक और श्रेयस अय्यर ने 56 रन बनाये|

न्यूजीलैंड के खिलाफ़ तीसरे लीग मैच में भी अय्यर ने अर्धशतक जड़ा और वरुण चक्रवर्ती ने 5 विकेट लेकर भारत को मैच जिता दिया |

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गेंदबाजी में शमी और चक्रवर्ती चले और बल्लेबाजी में कोहली अय्यर पांड्या और राहुल|

भारत को फाइनल में फिर से न्यूजीलैंड का सामना करना पड़ा|वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव ने कीवी बल्लेबाजों को 251 पर रोक दिया और रोहित शर्मा ने अर्धशतक ,अय्यर ने 48 और के एल राहुल ने नाबाद 34 रन बना कर लक्ष्य पाकर न्यूजीलैंड को हरा दिया और भारत को 2025 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी का चैम्पियन बना दिया|

विपुल मिश्रा

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